मेरठ और बागपत जिले का भौगौलिक अध्ययन
Ph. D. Scholar Dept. of A.I.H.C and Archaeology, Banaras Hindu University, Varanasi
उत्तर-प्रदेश पाये जाने वाल्¨ पुरास्थल¨ं में ऊपरी गंगा घाटी से प्राप्त पुरास्थल¨ं का अपना एक अलग महत्व है। मेरे श¨ध का क्षेत्र ऊपरी गंगा घाटी में स्थित ‘‘मेरठ अ©र बागपत जिल्¨ का पुरातात्त्विक अध्ययन’’ है अतः हम सन्दर्भित जिल¨ं का अवल¨कन करेंगे।
मानव सभ्यता के विकास में किसी क्ष्¨त्र्ा विश्¨ष की भ©ग¨लिक स्थिति अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्य¨ंकि इससे मानवीय क्रियाकलाप प्रभावित ह¨ता है। उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियाँ गंगा अ©र यमुना है। गंगा नदी का बृहदतम् हिस्सा उत्तर प्रदेश से ह¨कर गुजरता है जिसे हम अध्ययन की सुविधानुसार तीन क्ष्¨त्र्ा¨ं में विभाजित करते हैं-
1. गंगा का ऊपरी मैदान
2. गंगा का मध्य मैदान
3. गंगा का निचला मैदान
मेरठ जिला गंगा यमुना के बीच 290 1’ उत्तरी अक्षांश 750 45’ पूर्व देशान्तर पर स्थित है। यहाँ से सिन्धु सभ्यता के पतन¨न्मुख तथा उसके बाद के अवश्¨ष प्राप्त हुए हैं।
बागपत जिला यमुना नदी के किनारे 280 57’ उत्तरी अक्षांश अ©र 770 13’ पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। यहाँ से सन©ली नामक एक पुरास्थल की प्राप्ति हुई जहाँ से सैन्धव संस्कृति की सबसे बड़ी समाधि मिली है।
आधुनिक समय में मेरठ जिल्¨ का क्ष्¨त्र्ाफल 974 वर्ग मील अर्थात् 2,522 किल्¨ामीटर है किन्तु अंग्रेजी साम्राज्य के समय इसका क्ष्¨त्र्ाफल 2362 वर्गमील अर्थात् 6119 वर्ग किल¨मीटर था उस समय आधुनिक जिला गाजियाबाद अ©र बागपत मेरठ का हिस्सा हुआ करता था। मेरठ के पूर्वी सीमा पर बिजन©र, मुरादाबाद अ©र गंगा का मुहाना है एवं पश्चिमी सीमा पर करनाल (हरियाणा) अ©र यमुना का मुहाना है। इस क्ष्¨त्र्ा की उत्पादकता गंगा अ©र यमुना नदिय¨ं के प्रभाव से ही है। इस क्ष्¨त्र्ा का महत्वपूर्ण हिस्सा यमुना अ©र हिण्डन नदिय¨ं के द¨आब क्ष्¨त्र्ा में ही आता है जहाँ की मिट्टी द¨मट है। यहाँ द¨ सहायक नदियाँ भी हैं एक ‘हिण्डन’ ज¨ यमुना नदी से निकलती है अ©र दूसरी ‘काली नदी’ ज¨ गंगा नदी से निकलती है। इन द¨न¨ं नदिय¨ं के जुड़ाव का कार्य एक छ¨टी नदी ‘नालास’ करती है। हिण्डन केवल वर्षा ऋतु में ही न©गम्य युक्त रहती है किन्तु काली नदी न©गम्य युक्त नहीं है। हिण्डन नदी के बाढ़ का फैलाव क्ष्¨त्र्ा काली नदी से च©ड़ा है। ये नदियाँ मेरठ अ©र उसके आस-पास के जिल¨ं के कृषि अ©र अर्थव्यवस्था का आधार है। यहाँ यदा-कदा ही वर्षा का अ©सत 40 सेमी से ऊपर ह¨ता है। गंगा के तटवर्ती क्ष्¨त्र्ा¨ं में यमुना की अपेक्षा थ¨ड़ी अधिक वर्षा ह¨ती है। मेरठ का ज¨ उन्नत कृषि य¨ग्य क्ष्¨त्र्ा है वह मुख्य रूप से चावल, दाल, गन्ना, कपास अ©र मकई की उत्पादकता के लिए प्रसिद्ध है। इस उत्पादकता का प्रमुख कारण गंगा अ©र यमुना नदिय¨ं से बनाया गया नहर¨ं का तंत्र्ा है। प्राचीन काल में इन क्ष्¨त्र्ा¨ं में ऐसा नहर¨ं का जाल था इसके बारे में कुछ खास नहीं कहा जा सकता।
आधुनिक युग में इन नहर¨ं के जाल क¨ अंग्रेज¨ं ने बनवाया है किन्तु इसकी आधारशिला मुगल काल में ही रख दी गयी थी। यह क्ष्¨त्र्ा महाभारत कालीन परम्परा के क्ष्¨त्र्ा¨ं के काफी नजदीक जुड़ा है किन्तु यहाँ से अभी तक उस प्रकार का क¨ई भी टीला प्रकाश में नहीं आया है।
14वीं शताब्दी में फिर¨जशाह तुगलक ने इस क्ष्¨त्र्ा से अश¨क स्तम्भ क¨ स्थानान्तरित करवाकर दिल्ली में स्थापित करवाया था किन्तु अभी तक उस क्ष्¨त्र्ा की निश्चित रूप से पहचान नहीं ह¨ पायी है। हाल ही में यहाँ से एक ब©द्ध मन्दिर की प्राप्ति हुई है ज¨ जामा मस्जिद के समीप है। मेरठ जिल्¨ का ज¨ सरकारी दस्तावेज है वह मेरठ जिल्¨ क¨ कई क्ष्¨त्र्ा¨ं में विभाजित करता है। गंगा अ©र यमुना नदिय¨ं के बीच उत्तर-पश्चिम का क्ष्¨त्र्ा ज¨ बागपत जिल्¨ के आस-पास का भाग है उसे खादिर भूमि कहते हैं। म©लिक रूप से यह क्ष्¨त्र्ा गंगा अ©र यमुना नदिय¨ं के बीच स्थित है। यमुना नदी अ©र नहरी क्ष्¨त्र्ा के बीच स्थित भाग का क्रमिक विभाजन राजकीय दस्तावेज¨ं में चिन्हित है ल्¨किन यह विभाजन प्राचीन समय में था ऐसा पूर्ण रूप से नहीं कहा जा सकता। वर्तमान समय में यमुना का पूर्वी क्ष्¨त्र्ा सिंचाई के लिए उपयुक्त नहीं है। यह बलुई मिट्टी वाला क्ष्¨त्र्ा है अ©र खरबूजे के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। इस क्ष्¨त्र्ा के दक्षिण दिशा में लूनी नदी का बाढ़ प्रभावित क्ष्¨त्र्ा आता है अ©र उत्तरी क्ष्¨त्र्ा का ऊपरी हिस्सा ज¨ बलुई मिट्टी वाला है वह अनुर्वर है। एक अन्य नदी ‘किरसानी’ भी इस क्ष्¨त्र्ा की उत्पादकता में कुछ भूमिका अदा करती है इसका बहाव उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ तब तक बना रहता है जब तक बरवाना तहसील के पास हिण्डन नदी में मिल नहीं जाती है। हिण्डन नदी की खादिर भूमि अत्यन्त ही उपजाऊ है। यहाँ का दसना क्ष्¨त्र्ा झील अ©र ताल वाला क्ष्¨त्र्ा है। इस क्ष्¨त्र्ा का पूर्वी फैलाव गंगा के खादिर भाग तक है। इस क्ष्¨त्र्ा की भूमि रेतील्¨ प्रकार की अर्थात् बलुई है। यहाँ एक ‘छ¨या’ नदी है ज¨ काली नदी की ही शाखा है इसे पूर्वी काली नदी भी कहते हैं ज¨ मवाना तहसील में गंगा से मिल जाती है यह क्ष्¨त्र्ा हस्तिनापुर के आस-पास पड़ता है।
गंगा के खादिर भाग में हरे घास वाल्¨ जंगल हैं जिसमें सुअर, बाघ अ©र अन्य जंगली जानवर¨ं के साथ-साथ हाथी भी पाये जाते हैं।
मेरठ का क्ष्¨त्र्ा अत्यधिक उपजाऊ है जिसमें खरीफ की फसल गन्ना उत्पादन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है अ©र रवि की फसल में गेहूँ, चना अ©र मटर का उत्पादन ह¨ता है।
सन्दर्भ
Agrawal, D. P. 1969. The Copper Hoards Problem: A Technological Angle. Asian Perspectives
Chakrabarti, D.K. Archaeological Geography of The Ganga plain. New Delhi: Munshiram Manoharlal Publisher Pvt.
Dixit, K.N.1984. Late Harappan in northern india.in : B.B. Lal & S.P. Gupta, Eds. Frontiers of the Indus Civilization. Delhi: Books and Books.
Lal, B.B.1972. The Copper Hoards Culture of The Ganga Valley. Antiquity.
Dubey, A.K. 2005. Madhya Ganga ghati me adhiwas prakriya ( jaunpur zile ke vishesh sandarbh me ) .Allahabad.
Indian Archaeological Review, 1967- 68, ed.B.B.Lal. New Delhi: Archaeological survey of India.
Indian Archaeological Review, 1968-69, ed.B.B.Lal. New Delhi: Archaeological survey of India.
Indian Archaeological Review, 1969-70, ed.B.B.Lal. New Delhi: Archaeological survey of India.
Indian Archaeological Review, 1978-79, ed. New Delhi: Archaeological survey of India.
Indian Archaeological Review,1970-71, ed.M.N. Deshpande. New Delhi: Archaeological survey of India.
Received on 15.12.2014
Revised on 25.12.2014
Accepted on 28.12.2014
© A&V Publication all right reserved
Research J. Humanities and Social Sciences. 5(4): October-December, 2014, 403-404